सड़क किनारे चाय की टापरी हो, ढाबा या छोटा-मोटा रेस्टोरेंट, किसी वेटर की मजाल थी की मुन्नू मियां की नाक के नीचे से एक नया पैसा भी टिप के तौर पे लेलें? !! और मुन्नू भी इस बात की बड़ी शान बघारते थे " अबे काय की टिप? कैसी टिप? फ्री में थोड़ी खिला पिला रहे हमें ये? 27 साल हो गए बेटे, हिम्मत नहीं हुई आजतक किसी वेटर की, सौंफ खिलाते हुए भी TIP पूछने की हमसे, हाँ! " ऑटो में बैठे मुन्नू ये बता ही रहे थे हमें, की सिग्नल पर ऑटो रुका. एक छोटा बच्चा फाटे कपड़ों में आया और बोला" पानी पिला दो,...साहब, खूब अच्छी बहु आये तुम्हारी". मुन्नू ने पहले तो "आगे चलो बे, हमारी सेटिंग हेगी, तुम क्या बनवाओगे...हेहेहे" कहकर झटक दिया.
जब वो बच्चा नहीं माना तो जेब से एक रुपया निकालकर दिया और तुरंत फोन में कुछ टाइप करने लगा. अपने दोस्त को ऐसे सीरियस होकर टाइप करते हुए हमने पहली बार देखा था. घर पर भी सब ठीक था मुन्नू के, ना ही उनकी अपनी सेटिंग से कोई विवाद था .... फिर क्या? झाँका तो दो पंक्तियाँ दिखाई दी, जिसके बाद मुन्नू मियाँ मेरठी ने हमें "private हेगा " कहकर झटक दिया ....वो पंक्तिया थी ...
जब वो बच्चा नहीं माना तो जेब से एक रुपया निकालकर दिया और तुरंत फोन में कुछ टाइप करने लगा. अपने दोस्त को ऐसे सीरियस होकर टाइप करते हुए हमने पहली बार देखा था. घर पर भी सब ठीक था मुन्नू के, ना ही उनकी अपनी सेटिंग से कोई विवाद था .... फिर क्या? झाँका तो दो पंक्तियाँ दिखाई दी, जिसके बाद मुन्नू मियाँ मेरठी ने हमें "private हेगा " कहकर झटक दिया ....वो पंक्तिया थी ...
कपड़े "उसके" फटे थे पर 'नंगा' मै महसूस कर रहा हूँ...
वो "छोटू" एक रुपये में हजारो की मुस्कान दे गया
वो "छोटू" एक रुपये में हजारो की मुस्कान दे गया
मुन्नू भाई का ये शायर रूप देखकर मैं अवाक था.